पाकिस्तान के एक समाचार पत्र 'डाउन' में प्रकाशित लेख में इंदिरा गांधी द्वारा लगाई गई इमरजेंसी (1975-77) और नरेंद्र मोदी के पिछले 12 वर्षों के शासन की तुलना की गई है। लेख में लोकतांत्रिक मूल्यों के ह्रास, मीडिया की स्वतंत्रता पर अंकुश और राजनीतिक विरोध को दबाने जैसे मुद्दों पर प्रकाश डाला गया है। इंदिरा गांधी के शासनकाल में प्रेस सेंसरशिप और नागरिक अधिकारों का निलंबन किया गया था, जबकि मोदी सरकार पर आलोचकों को चुप कराने और संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप है। लेख में बताया गया है कि कैसे दोनों ही सरकारों ने राष्ट्रीय सुरक्षा को आधार बनाकर कई विवादास्पद कदम उठाए। हालांकि, लेख में यह भी स्पष्ट किया गया है कि दोनों स्थितियों में महत्वपूर्ण अंतर हैं, जैसे कि वर्तमान सरकार के पास अभी भी चुनाव होते हैं। लेख में भारत में लोकतंत्र के भविष्य पर चिंता व्यक्त की गई है और लोकतांत्रिक मानदंडों को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया है। यह तुलना भारत की राजनीतिक स्थिति और लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण के महत्व को दर्शाती है।
