ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के निधन के बाद, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है। यह निमंत्रण भारत के लिए एक जटिल स्थिति पैदा करता है, क्योंकि भारत और ईरान के संबंध ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में तनाव भी बढ़ा है। इजराइल के साथ भारत के बढ़ते संबंधों और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर मतभेदों के कारण यह दौरा विदेश नीति के लिहाज़ से संवेदनशील हो सकता है। मोदी की उपस्थिति ईरान के साथ संबंधों को मजबूत करने का संकेत दे सकती है, लेकिन इससे इजराइल और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों पर भी असर पड़ सकता है। भारत सरकार इस मामले पर सावधानीपूर्वक विचार कर रही है और अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। यह निर्णय भारत की विदेश नीति के संतुलन और क्षेत्रीय भू-राजनीति को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा।
