मिंग वंश के एक विद्वान, झांग हुआंग ने 17वीं सदी में मानव ज्ञान को चीनी दृष्टिकोण से चित्रित करने का बीड़ा उठाया था। उन्होंने 'तुशु बियान' नामक 127 खंडों का एक विशाल विश्वकोश संकलित किया, जिसका अर्थ है 'चित्रों और ग्रंथों की संकलनिका'। यह कार्य 1613 में प्रकाशित हुआ और इसमें स्वर्ग, पृथ्वी और मानवता से संबंधित अवधारणाओं को दर्ज किया गया है। झांग हुआंग ने दशकों में फैले 200 से अधिक मुद्रित स्रोतों का उपयोग किया। उनका लक्ष्य सभी चित्रों और ग्रंथों को एक साथ लाना था। यह विश्वकोश उस समय के चीनी विद्वानों की सोच और ज्ञान प्रणाली को दर्शाता है। तुशु बियान, ज्ञान के व्यवस्थित संग्रह का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।