यह लेख प्रवासियों के बदलते दृष्टिकोण पर प्रकाश डालता है। पहले जहाँ उन्हें स्वतंत्र व्यक्ति माना जाता था, वहीं अब उन्हें विशिष्ट लक्ष्यों को प्राप्त करने के एक साधन के रूप में देखा जा रहा है। यह भू-राजनीतिक फायदे के लिए, राजनीतिक प्रतीकों के रूप में, या मात्र श्रम शक्ति और सांख्यिकीय इकाई के रूप में हो सकता है। प्रवासी अब अपनी स्वायत्तता खो रहे हैं और उन्हें विभिन्न उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। लेख इस बात पर चिंता व्यक्त करता है कि कैसे मानवता को दरकिनार करते हुए प्रवासियों को वस्तु समझा जा रहा है। यह स्थिति प्रवासियों के अधिकारों और सम्मान के लिए एक चुनौती है। इस प्रवृत्ति पर ध्यान देना और प्रवासियों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण बनाए रखना आवश्यक है।