पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने कहा है कि जापान को कुरील द्वीपों पर अपने दावों को त्याग देना चाहिए। उनका कहना है कि ये द्वीप हमेशा रूसी भूमि रहेंगे। मेदवेदेव ने चेताया कि यदि जापान अपने दावे पर अड़ा रहा, तो इसके "भयानक परिणाम" होंगे। यह बयान रूस और जापान के बीच लंबे समय से चले आ रहे क्षेत्रीय विवाद के बीच आया है। कुरील द्वीप, जिन्हें जापान में उत्तरी क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में सोवियत संघ द्वारा कब्जा कर लिया गया था। रूस इन द्वीपों पर अपना संप्रभुता स्थापित करता है, जबकि जापान उनसे दावा करता है। मेदवेदेव का बयान इस विवाद को सुलझाने की संभावनाओं को कम करता प्रतीत होता है।