माली में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने वाले कई संगठनों के प्रयासों के बावजूद, हाल ही में खतना (एफजीएम) प्रथा का समर्थन करने वाला एक अभियान शुरू किया गया है। इस पहल ने कई नारीवादी संगठनों और नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है। एफजीएम एक हानिकारक पारंपरिक प्रथा है जिसका महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य और अधिकारों पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आलोचकों का तर्क है कि इस अभियान से एफजीएम के खिलाफ वर्षों से चल रहे प्रयासों को कमजोर किया जाएगा। मानवाधिकार समूह इस अभियान की निंदा करते हैं और एफजीएम को समाप्त करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं। इस मुद्दे पर माली में बहस तेज हो गई है, क्योंकि समर्थक सांस्कृतिक परंपराओं का हवाला देते हैं जबकि विरोधी स्वास्थ्य और मानवाधिकारों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। यह अभियान एफजीएम के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण चुनौती प्रस्तुत करता है।

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