यूरोप में चल रहे सूखे के कारण जलविद्युत उत्पादन में भारी गिरावट आई है। वर्तमान में, औसत से 30 प्रतिशत कम बिजली उत्पन्न हो रही है। यह कमी बिजली आपूर्ति पर सीधा प्रभाव डाल सकती है। उद्योगों को भी इसकी चिंता है, क्योंकि कई कारखानों को अपने मशीनों को ठंडा रखने के लिए नदी के पानी की आवश्यकता होती है। जल स्तर में कमी से औद्योगिक उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञ इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं और भविष्य में ऊर्जा उत्पादन पर इसके संभावित प्रभावों का आकलन कर रहे हैं। यह सूखा जलविद्युत पर निर्भर देशों के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करता है।