प्रेम में डूबे लोग, नशे की हालत में और चुनाव में नए उम्मीदवार अक्सर बड़ी-बड़ी कसम खाते हैं। यह कसम खाने वालों में भावनात्मक तीव्रता और उत्साह का स्तर बहुत अधिक होता है। अध्ययन बताते हैं कि ऐसे क्षणों में लोग बिना सोचे-समझे वादे कर देते हैं, जिनकी पूर्ति करना मुश्किल होता है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ये कसमें तात्कालिक भावनाओं का परिणाम होती हैं, जिनमें वास्तविकता की परख कम हो जाती है। इसलिए, इन कसमों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इनकी विश्वसनीयता संदिग्ध होती है। यह स्थिति प्रेम, नशा और चुनावी माहौल में विशेष रूप से देखी जाती है।