अफ्रीका से गुआनाकास्टे पहुंचा एक वाद्य यंत्र, जो कई दशकों तक भुला दिया गया था, अब फिर से जीवित हो गया है। यह यंत्र मारिम्बा या क्विजोंगो की तरह भाग्यशाली नहीं था, और लगभग विलुप्त हो चुका था। होंडुरास के कुछ बीजों और उत्साही लोगों के एक समूह के प्रयासों से इसे पुनर्जीवित किया गया है। इस कार्य को करने वाली महिला को ‘नायिका’ के रूप में सराहा जा रहा है। यह कहानी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे पुनर्जीवित करने के महत्व को दर्शाती है। यह एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि कैसे समर्पण और सहयोग से खोई हुई परंपराओं को फिर से जीवित किया जा सकता है। अब यह वाद्य यंत्र अपनी पुरानी पहचान फिर से हासिल कर रहा है।