विवाह के कई वर्ष बीत जाने के बाद भी कई दम्पतियों के रिश्तों में उदासीनता आ जाती है। बाहरी तौर पर सब कुछ सामान्य दिखता है - एक साथ जीवन, बच्चे, सुख-दुख सब साझा होते हैं, लेकिन भीतर संवाद कम हो जाता है। हंसी-खुशी गायब हो जाती है और छोटी-छोटी बातों पर भी नाराज़गी बढ़ने लगती है। दोनों एक-दूसरे को छोड़ना नहीं चाहते, फिर भी पहले जैसी निकटता नहीं रहती। विशेषज्ञों के अनुसार, यह 'वैवाहिक थकान' का परिणाम हो सकता है। यह कोई बड़ा संकट नहीं है, बल्कि विश्वासघात की बजाय एक धीमी प्रक्रिया है। यह स्थिति अक्सर बिना किसी स्पष्ट कारण के उत्पन्न होती है और रिश्ते को कमजोर कर सकती है। इस थकान से निपटने के लिए संवाद और आपसी समझ को बढ़ाना महत्वपूर्ण है।