वियना उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने माना कि किसी अपमानजनक टिप्पणी पर ‘लाइक’ करने से मानहानि का अपराध नहीं होता है। यह मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा था जिसने एक अन्य व्यक्ति की आलोचनात्मक टिप्पणी को ‘लाइक’ किया था। अदालत ने कहा कि सिर्फ ‘लाइक’ करने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति उस टिप्पणी से सहमत है या उसका समर्थन करता है। इस फैसले से ऑनलाइन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समर्थकों को राहत मिली है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ‘लाइक’ करने वाले व्यक्ति को पता है कि टिप्पणी झूठी और मानहानिकारक है, तो वह कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है। यह फैसला ऑस्ट्रिया में ऑनलाइन मानहानि के मामलों में एक मिसाल कायम करेगा।
