इजराइल और लेबनान के बीच अमेरिका प्रायोजित वार्ता का सातवाँ दौर प्रतीकात्मक रहा, लेकिन इसमें कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि वार्ता अब गतिरोध की ओर बढ़ रही है। मुख्य बाधाएँ अब केवल तकनीकी नहीं रहीं, बल्कि सैन्य वास्तविकताएँ, घरेलू राजनीतिक दबाव, अमेरिका की घटती दिलचस्पी और क्षेत्रीय तनावों का एक संयोजन है। यह वार्ता ईरान-अमेरिका संबंधों और इजराइल की घरेलू राजनीति से भी जुड़ी हुई है। लेबनानी-इजरायली समझौते की प्रगति इन व्यापक रणनीतिक कारकों पर निर्भर करती है। वर्तमान में, समझौते की भावना और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ा अंतर है। वार्ता के सफल होने की संभावना कम होती जा रही है।