१९९९ में, सर्बियाई बलों द्वारा कोसोवो अल्बानियाई परिवारों को उनके घरों से बेदखल किए जाने के दौरान, साली मोरीना और उनकी पत्नी को अपने तीन बच्चों को, जो मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित थे, हाथ में लेकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा। यह घटना कोसोवो युद्ध के दौरान मानवीय त्रासदी और परिवारों के अदम्य साहस का प्रतीक है। माता-पिता ने अपनी जान जोखिम में डालकर अपने बच्चों को सुरक्षित रखने का असाधारण प्रयास किया। बच्चों को गोद में लेकर लंबी और कठिन यात्रा करनी पड़ी। यह कहानी युद्ध की भयावहता और एक परिवार के अटूट प्रेम की मार्मिक याद दिलाती है। यह घटना कोसोवो के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जो मानवीय मूल्यों और दृढ़ संकल्प की शक्ति को उजागर करती है।