यह पाठ ‘उशब अल-महमियात’ (‘संरक्षित घास’) श्रृंखला से संबंधित है। इसमें फ्रांज काफ्का के एक उद्धरण का उपयोग किया गया है, जिसमें उद्धृत किया गया है कि उद्धारकर्ता केवल तभी आएगा जब उसकी आवश्यकता नहीं रहेगी। काफ्का के अनुसार, उद्धारकर्ता आने के अगले दिन ही आएगा, न कि अंतिम दिन, बल्कि अंतिम दिन के बाद। यह अंश ‘द ब्लू ऑक्टावो नोटबुक’ से लिया गया है और इसका अनुवाद अर्न्स्ट कैसर और एइथने विल्किन्स ने किया है। यह पाठ ‘मादा मस्र’ पर प्रकाशित हुआ है और रक्का शहर के संदर्भ में चर्चा का विषय है, हालांकि प्रत्यक्ष संबंध स्पष्ट नहीं है। यह उद्धरण किसी प्रकार की प्रतीकात्मक या दार्शनिक बहस का हिस्सा प्रतीत होता है।