नाबालिगों द्वारा अपराध करने पर कानूनी कार्यवाही कैसे की जाती है, यह एक जटिल विषय है। किशोर न्याय कानून, वयस्कों से अलग, नाबालिगों के लिए विशेष प्रक्रियाएं निर्धारित करता है। इस कानून का उद्देश्य अपराध करने वाले बच्चों का पुनर्वास सुनिश्चित करना है, न कि केवल उन्हें दंडित करना। अपराध की गंभीरता और नाबालिग की उम्र के आधार पर, मामलों को किशोर न्याय बोर्ड या नियमित अदालतों में सुना जा सकता है। कुछ गंभीर अपराधों में, नाबालिगों को वयस्क के रूप में मुकदमा चलाया जा सकता है, लेकिन यह एक दुर्लभ प्रक्रिया है। कानून नाबालिगों के अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें भविष्य में अपराध करने से रोकने पर केंद्रित है। पुनर्वास कार्यक्रमों और परामर्श के माध्यम से, नाबालिगों को समाज में फिर से एकीकृत करने में मदद मिलती है।
