जून महीने में नौकरियों की भर्ती अपेक्षा से कम रही, जिससे श्रम बाजार में कमजोरी के संकेत मिले हैं। अर्थशास्त्रियों का अनुमान था कि अधिक नौकरियां सृजित होंगी, लेकिन यह आंकड़ा उनसे कम रहा। ईरान युद्ध के कारण बढ़ी महंगाई ने इस स्थिति को और बदतर बना दिया है। इस गिरावट से अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां भविष्य में अनिश्चितता को देखते हुए नई भर्तियां करने में हिचकिचा रही हैं। यह स्थिति कर्मचारियों के लिए चिंताजनक है, क्योंकि इससे रोजगार की तलाश करने वालों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए जल्द ही कदम उठा सकती है।
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