जलमार्ग के निजीकरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और आने वाले कुछ दिनों में इसका फैसला हो जाएगा। इस सौदे के लिए दो बड़ी कंपनियां प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। जान डी नुल नामक कंपनी ने हाल ही में इस परियोजना से जुड़े शुल्कों को कम करने की संभावनाओं पर अपनी राय व्यक्त की है। कंपनी का कहना है कि कुछ कारणों से शुल्कों में कटौती करना संभव नहीं है। इस सौदे को 'वर्ष का सौदा' माना जा रहा है, क्योंकि यह जलमार्ग के प्रबंधन और विकास के लिए महत्वपूर्ण है। बोली प्रक्रिया में शामिल दोनों कंपनियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। अंतिम निर्णय से जलमार्ग के भविष्य पर असर पड़ेगा।