किर्गिस्तान के आपातकालीन स्थितियाँ मंत्रालय के अधीन हाइड्रोमेट्रोलॉजिकल सेवा (किर्गिज़हाइड्रोमेट) के अनुसार, पिछले 70-90 वर्षों में इस्सिक-कुल बेसिन में ग्लेशियर क्षेत्र में 33.7% की कमी आई है। यह डेटा जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील क्षेत्र में महत्वपूर्ण चिंता का विषय है । इस्सिक-कुल बेसिन मध्य एशिया का एक महत्वपूर्ण जल स्रोत है और ग्लेशियरों के पिघलने से जल संसाधनों पर असर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह कमी ग्लोबल वार्मिंग के कारण हो रही है, जो क्षेत्र में तापमान बढ़ा रही है। ग्लेशियरों के सिकुड़ने का असर स्थानीय समुदायों और कृषि पर पड़ेगा। विशेषज्ञों ने इस स्थिति को संबोधित करने और जल संसाधनों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए तत्काल कार्रवाई का आह्वान किया है। इस गिरावट से पारिस्थितिक तंत्र और अर्थव्यवस्था दोनों पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकते हैं।