दुनिया के कई हिस्सों में आज भी कन्या शिशु को बोझ माना जाता है। इस संदर्भ में, यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इस्लाम ने कन्या शिशु के लिए क्या अधिकार सुनिश्चित किए थे। ऐतिहासिक रूप से, इस्लाम में कन्या शिशु की हत्या जैसी प्रथाओं को प्रतिबंधित किया गया था, जो अरब प्रायद्वीप में आम थी। इस्लामी शिक्षाओं में बेटियों के पालन-पोषण और शिक्षा पर जोर दिया गया है, और उन्हें संपत्ति का अधिकार दिया गया है, हालांकि यह अधिकार बेटों से भिन्न हो सकता है। कई इस्लामी विद्वानों का तर्क है कि इस्लाम ने महिलाओं को पुरुषों के समान आध्यात्मिक और नैतिक दर्जा दिया है। फिर भी, सांस्कृतिक और सामाजिक प्रथाएं अक्सर धार्मिक शिक्षाओं से भिन्न होती हैं, जिसके कारण कुछ मुस्लिम समुदायों में लैंगिक असमानता बनी हुई है। वर्तमान में, कन्या शिशु के अधिकारों को बढ़ावा देने और लैंगिक समानता को स्थापित करने के लिए प्रयास जारी हैं।