तलाक के बाद बच्चों की कस्टडी एक जटिल मुद्दा है। इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार, तलाक के बाद बच्चों की परवरिश का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इस विषय पर कई महत्वपूर्ण निर्णय दिए थे, जो बच्चों के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देते हैं। इन फैसलों में माँ की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया है, खासकर छोटे बच्चों की परवरिश में। पिता की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों की जरूरतों को पूरा करे और उनकी उचित देखभाल सुनिश्चित करे। इस्लामी कानून बच्चों के पालन-पोषण में दोनों माता-पिता की भागीदारी को प्रोत्साहित करता है, भले ही वे अलग हो गए हों। इन निर्णयों का उद्देश्य बच्चों को भावनात्मक और शारीरिक रूप से सुरक्षित रखना है।