ईरान लगातार चौथे दिन कुवैत के अलवणीकरण और बिजली संयंत्रों पर हमले कर रहा है। ये हमले उस देश पर अभूतपूर्व दबाव डाल रहे हैं जो अपनी पानी की आपूर्ति के लिए भारी रूप से अलवणीकरण पर निर्भर है। कुछ विश्लेषकों के अनुसार, ईरान एक ऐसे देश पर "मनोवैज्ञानिक युद्ध" छेड़ने का प्रयास कर रहा है जिसके पास जवाबी कार्रवाई के लिए बहुत कम विकल्प हैं। कुवैत की जल सुरक्षा को खतरा है क्योंकि देश अपनी ताज़ी पानी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अलवणीकरण पर बहुत ज़्यादा निर्भर करता है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि ये हमले ईरान की क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य कुवैत पर दबाव बनाना है। वर्तमान स्थिति से क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका है। इन हमलों के पीछे ईरान का मकसद कुवैत को अस्थिर करना और उस पर अपनी शर्तें थोपना हो सकता है।