अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता के पहले दिन लेबनान, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य और ईरान की जमे हुई संपत्तियों जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इस बीच, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को ‘बहुत बुरी तरह’ निशाना बनाने की धमकी दी है। इस धमकी के जवाब में ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ़ ने अमेरिका को अपनी भाषा के इस्तेमाल में सावधानी बरतने की चेतावनी दी है। यह वार्ता दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के प्रयासों का हिस्सा है, जो हाल के वर्षों में कई बार बढ़ा है। ट्रंप की टिप्पणी से यह स्पष्ट है कि अमेरिका अभी भी ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने की नीति के प्रति गंभीर है। वार्ता के परिणाम अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जमे हुए संपत्ति का मुद्दा वार्ता में एक बड़ी बाधा बन सकता है।