ऑस्ट्रेलियाई सरकार की आदिवासी खरीद नीति पर तीखी आलोचना हो रही है। पिछले एक दशक में लगभग 15 अरब डॉलर खर्च किए गए, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इससे आदिवासी समुदायों को कोई खास फायदा नहीं हुआ है। 'ब्लैक क्लैडिंग' नामक एक प्रक्रिया के कारण, गैर-आदिवासी व्यवसायों को आदिवासी स्वामित्व का दिखावा करके अनुबंध प्राप्त हो रहे हैं। इस नीति का उद्देश्य आदिवासी व्यवसायों को सरकारी अनुबंधों में प्राथमिकता देना था, लेकिन यह लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के कारण नीति का अपेक्षित प्रभाव नहीं दिख रहा है। आलोचकों ने इसे 'आर्थिक चोरी की पीढ़ी' बताया है, क्योंकि वास्तविक आदिवासी व्यवसायों को अवसरों से वंचित किया जा रहा है। सरकार इस मामले की समीक्षा करने के लिए दबाव में है।
