भारत का ऑटो उद्योग इथेनॉल ईंधन के अनिवार्य उपयोग के फैसले का समर्थन कर रहा है, जबकि इस फैसले को लेकर विरोध भी हो रहा है। वाहन निर्माता कंपनियों का कहना है कि यह कदम पर्यावरण के लिए फायदेमंद है और आयात पर निर्भरता कम करेगा। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इथेनॉल की उपलब्धता और बुनियादी ढांचे की कमी इस जनादेश को लागू करने में बाधा बन सकती है। उद्योग का कहना है कि वे सरकार के साथ मिलकर इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए तैयार हैं। यह जनादेश भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस फैसले से किसानों को भी लाभ होगा क्योंकि इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी। सरकार का लक्ष्य है कि 2025 तक पेट्रोल में 20% इथेनॉल का मिश्रण किया जाए।

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