आइसलैंड यूरोपीय संघ की सदस्यता पर फिर से विचार करने के लिए जनमत संग्रह करने जा रहा है। यह निर्णय पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के रेकजाविक में राजदूत के प्रभाव के कारण लिया गया है। राजदूत ने आइसलैंड सरकार पर यूरोपीय संघ के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का दबाव डाला। पहले, आइसलैंड ने 2013 में यूरोपीय संघ की सदस्यता के लिए अपनी बोली वापस ले ली थी। अब, भू-राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव और ट्रम्प के राजदूत के प्रयासों से स्थिति बदल गई है। जनमत संग्रह के परिणाम आइसलैंड के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होंगे, और यह यूरोपीय संघ के विस्तार को भी प्रभावित कर सकता है। यह घटनाक्रम अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका के प्रभाव को दर्शाता है।

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