ल्यूक केम्प की पुस्तक “गोलियाथ का अभिशाप”, समाजों के पतन के माध्यम से मानव इतिहास की एक नई व्याख्या प्रस्तुत करने का दावा करती है। हालाँकि, जोस कार्लोस फर्नांडिस की एक आलोचनात्मक समीक्षा दर्शाती है कि यह पुस्तक अपनी महत्वाकांक्षाओं पर खरी नहीं उतरती। यह पुस्तक, मानव इतिहास के एक मौलिक पुनर्विचार के रूप में प्रस्तुत की गई है, अपेक्षाओं से कम साबित होती है। फर्नांडिस का तर्क है कि पुस्तक में प्रस्तुत दृष्टिकोण भ्रामक है और इतिहास की जटिलताओं को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं करता है। समीक्षा में पुस्तक की कमियों और इसकी ऐतिहासिक सटीकता पर सवाल उठाए गए हैं। यह कार्य, जो एक 'कट्टरपंथी पुनर्विचार' होने का वादा करता है, वास्तविकता में उस स्तर तक पहुंचने में विफल रहता है। कुल मिलाकर, फर्नांडिस की समीक्षा पुस्तक के दावों पर संदेह व्यक्त करती है और पाठकों को इसकी व्याख्याओं का आलोचनात्मक मूल्यांकन करने के लिए प्रोत्साहित करती है।