इतिहास की एक प्रतिष्ठित प्रतियोगिता, ‘एग्रीगेशन’, में समकालीन इतिहास के प्रश्नपत्र में ‘यूरोप में सत्तावादी शासन और आंदोलन (1918-1939)’ विषय शामिल है। हालांकि, कम्युनिज़्म विशेषज्ञ इतिहासकार Sylvain Boulouque ने इस प्रश्नपत्र में कम्युनिस्ट आंदोलन को शामिल न करने पर आश्चर्य व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यह एक उल्लेखनीय चूक है, क्योंकि कम्युनिज़्म भी 20वीं सदी के सत्तावादी शासन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। Boulouque के अनुसार, प्रतियोगिता में अन्य सत्तावादी विचारधाराओं का अध्ययन किया जा रहा है, लेकिन कम्युनिज़्म को जानबूझकर या अनजाने में छोड़ दिया गया है। यह स्थिति इतिहासकारों और शिक्षाविदों के बीच बहस का विषय बन सकती है। इस फैसले से कम्युनिज़्म के इतिहास और प्रभाव को समझने में कमी आ सकती है। विशेषज्ञ का मानना है कि एक व्यापक दृष्टिकोण के लिए सभी प्रमुख सत्तावादी आंदोलनों का अध्ययन आवश्यक है।
