हिमालयी क्षेत्र में सूखे की समस्या और उससे उबरने की कहानी, एक अनोखे त्योहार और एक दुर्लभ जीव—पेंगोलिन—के जीवन में मिलती-जुलती है। मछिन्द्रनाथ जात्रा नामक त्योहार और पेंगोलिन, दोनों ही एक ही क्षेत्र में निवास करते हैं और मानसून पर निर्भर हैं। दोनों ही अस्तित्व के लिए संघर्ष करते हैं, क्योंकि यह क्षेत्र लंबे समय से सूखे की चपेट में रहा है। यह संयोग है कि दोनों एक-दूसरे के बारे में अनजान हैं, फिर भी उनकी कहानियाँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। यह क्षेत्र जलवायु परिवर्तन और अनियमित मानसून के कारण जल संकट से जूझ रहा है, जिससे दोनों के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इस साझा संघर्ष से पता चलता है कि प्रकृति और संस्कृति दोनों ही एक ही पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं और एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
