हाल ही में आई भीषण गर्मी के दौरान, सरकार ने पिछली बार की तरह ही तत्काल प्रतिक्रिया देने पर ध्यान केंद्रित किया, और जलवायु परिवर्तन पर कोई स्पष्ट संदेश जारी नहीं किया। इस प्रतिक्रिया के कारण, लोग व्यक्तिगत स्तर पर गर्मी से निपटने के उपाय करने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे असमानताएँ बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दृष्टिकोण दीर्घकालिक समाधानों से ध्यान भटकाता है। सामूहिक सुरक्षा के लिए ठोस नीतिगत कदमों की आवश्यकता है, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण व्यक्तिगत उपायों पर अधिक जोर दिया जा रहा है। यह स्थिति कमजोर वर्गों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है, जिनके पास गर्मी से बचाव के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। सरकार को जलवायु परिवर्तन की गंभीरता को स्वीकार करते हुए, सभी के लिए समान रूप से प्रभावी उपाय करने चाहिए। इस तरह की निष्क्रियता से भविष्य में और भी गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
