फ्रांस में पड़ रही भीषण गर्मी का सबसे ज़्यादा असर वंचित समुदायों के युवाओं पर पड़ रहा है। ‘गेट्ट’अप’ संगठन की संस्थापक इनस सेडिकी ने ‘ले मोंडे’ को दिए साक्षात्कार में इस बात पर ज़ोर दिया है कि ऊर्जा की कमी और बढ़ती गर्मी के कारण ये युवा शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान हैं। उन्होंने संस्थागत उदासीनता और सामाजिक भेदभाव को भी ज़िम्मेदार ठहराया है। सेडिकी के अनुसार, जलवायु परिवर्तन का अन्यायपूर्ण प्रभाव इन युवाओं के जीवन को कठिन बना रहा है। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि सामाजिक असमानता को भी बढ़ा रही है। वंचित क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को गर्मी से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उनकी स्थिति और भी खराब हो गई है। इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने और उचित कदम उठाने की आवश्यकता है।
