शेख गुमी ने शरिया कानून के तहत विवाह के लिए सार्वजनिक धन के उपयोग का समर्थन किया है। उनका तर्क है कि यह उन राज्यों में वैध शासन है जहाँ अनैतिकता को प्रतिबंधित किया गया है। गुमी का मानना है कि शरिया कानून समुदाय के नैतिक मूल्यों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने सार्वजनिक धन का उपयोग विवाह को प्रोत्साहित करने और युवाओं को अनैतिक गतिविधियों से दूर रखने के लिए किया जाना चाहिए। यह बयान विवादास्पद हो सकता है क्योंकि यह धर्म और राज्य के बीच संबंधों के बारे में सवाल उठाता है। आलोचक तर्क दे सकते हैं कि सार्वजनिक धन का उपयोग धार्मिक प्रथाओं के लिए करना धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन है। गुमी के इस रुख ने देश में बहस छेड़ दी है।