बाल्टिक सागर क्षेत्र में सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम में लगातार व्यवधान की खबरें आ रही हैं। ये व्यवधान न केवल सामान्य ‘जैमिंग’ के रूप में हैं, बल्कि अधिक व्यवस्थित ‘स्पूफिंग’ के रूप में भी सामने आ रहे हैं, जिसके पीछे विदेशी शक्ति का हाथ माना जा रहा है। ‘स्पूफिंग’ में जीएनएसएस (GNSS) संकेतों में हेरफेर किया जाता है, जिससे वे अधिक व्यापक हो जाते हैं और उनका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। ट्रांसपोर्टस्टायरेल्सन (Transportstyrelsen) के यूनिट प्रमुख एंड्रियास होल्मग्रेन ने इस स्थिति को चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के व्यवधान नेविगेशन सिस्टम की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। यह स्थिति समुद्री यातायात और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियाँ पेश कर सकती है। अधिकारियों का कहना है कि वे स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं और इसकी जांच कर रहे हैं।
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