93 वर्षीय मात्रात्मक राजनीतिक विज्ञान के अग्रणी, रेन तागेपेरा के अनुसार, मानवता एक परिवर्तनकारी दौर से गुजर रही है। उनका मानना है कि उपभोक्तावाद की विचारधारा ग्रह की सीमाओं से टकरा रही है, जबकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनिश्चित भविष्य की ओर बढ़ रही है। तागेपेरा के विश्लेषण से पता चलता है कि राष्ट्र-राज्य की भूमिका कम हो सकती है और वैश्विक शक्ति के नए नेटवर्क उभर सकते हैं। वे ऐतिहासिक रुझानों और आंकड़ों का अध्ययन करके वर्तमान विश्व व्यवस्था को समझने का प्रयास करते हैं। उनका शोध दर्शाता है कि यदि वर्तमान प्रवृत्तियाँ जारी रहीं, तो भविष्य सामंती युग के समान हो सकता है। यह स्थिति शक्ति के विकेंद्रीकरण और स्थानीय नियंत्रण की ओर वापसी का संकेत दे सकती है। तागेपेरा का दृष्टिकोण भविष्य के संभावित परिदृश्यों पर विचार करने के लिए एक महत्वपूर्ण ढांचा प्रदान करता है।