न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय की प्रोफेसर कैरोलिन किसेन के अनुसार, आधुनिक इतिहास में तेल आपूर्ति में सबसे बड़ा व्यवधान आने के बाद तेल की मांग अपने चरम पर पहुंच गई है। इस व्यवधान ने तेल की मांग में गिरावट की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। पहले अनुमानों के मुकाबले यह बदलाव जल्दी आया है। वैश्विक तेल बाजार में यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो भविष्य में ऊर्जा नीतियों और निवेश को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि तेल की मांग अब धीरे-धीरे कम होने लगेगी, हालांकि यह कमी विभिन्न कारकों पर निर्भर करेगी। इस बदलाव का असर तेल उत्पादक देशों और ऊर्जा उद्योग पर पड़ेगा। यह स्थिति नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर बदलाव को प्रोत्साहित कर सकती है।
