संसद अध्यक्ष अल्बान बागबिन ने देश की सर्वोच्च न्यायालय की प्रतिष्ठा को कम करने वाले बढ़ते चलन पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि मामलों को सीधे सर्वोच्च न्यायालय ले जाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे न्यायालय की गरिमा कम हो रही है। बागबिन ने चेतावनी दी है कि सर्वोच्च न्यायालय को अब एक “सामान्य न्यायालय” के रूप में देखा जा रहा है, जो चिंताजनक है। उनका मानना है कि यह प्रवृत्ति न्यायपालिका की स्वतंत्रता और प्रभावशीलता को कमजोर कर सकती है। अध्यक्ष ने इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने और न्यायालय की प्रतिष्ठा बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने निचली अदालतों के फैसलों के खिलाफ सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने की प्रथा को हतोत्साहित करने का आह्वान किया। यह बयान न्यायपालिका और विधायिका के बीच संभावित तनाव का संकेत देता है।