अक्तूबर 2025 में हुए संघर्ष विराम के एक साल बाद भी गाज़ा पट्टी में पुनर्वास या सामान्य जीवन में वापसी नहीं हो पाई है। निवासी अभी भी तंबुओं में रह रहे हैं और रोज़ाना हवाई हमलों के डर से जी रहे हैं। उनका कहना है कि इस स्थिति के लिए हमास या इज़राइल अकेले ज़िम्मेदार नहीं हैं। गाज़ा के लोगों का जीवन अभी भी युद्ध जैसा ही है, बुनियादी ज़रूरतों की कमी है और भविष्य अनिश्चित है। पुनर्निर्माण की प्रक्रिया बहुत धीमी गति से चल रही है, जिससे लोगों में निराशा बढ़ रही है। यह संघर्ष विराम वास्तव में शांति लाने में विफल रहा है, और गाज़ा के निवासी एक बेहतर भविष्य की उम्मीद खो रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से तत्काल सहायता और स्थायी समाधान खोजने का आग्रह किया जा रहा है।