फ्रांस में संपन्न जी7 शिखर सम्मेलन में चीन को लेकर यूरोपीय देशों की चिंताएं सामने आई हैं। यूरोप, चीन के बढ़ते निर्यात और मुद्रा में हेरफेर के कारण उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए एक नई आर्थिक रणनीति चाहता है, जिसे ‘प्लाजा समझौते’ के समान माना जा रहा है। हालांकि, ईरान और यूक्रेन में चल रहे संघर्षों तथा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के रुख के कारण जी7 सदस्य इस मुद्दे पर एकमत नहीं हो सके। सम्मेलन में चीन के निर्यात और उत्पादन क्षमता से जुड़ी समस्याओं पर कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई। यूरोपीय नेता चीन के आर्थिक प्रभाव को संतुलित करने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकला है। यह स्थिति यूरोप के लिए एक जटिल चुनौती प्रस्तुत करती है, क्योंकि उसे चीन के साथ अपने आर्थिक संबंधों को बनाए रखने और अपनी अर्थव्यवस्था की रक्षा करने के बीच संतुलन साधना है।