केइको फुजिमोरी के पहले सरकारी संबोधन में संस्कृति क्षेत्र को पूरी तरह से अनदेखा कर दिया गया। राष्ट्रपति ने सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे और राज्य सुधार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया, लेकिन संस्कृति मंत्रालय, सांस्कृतिक विरासत, या सांस्कृतिक उद्योगों का कोई उल्लेख नहीं किया। यह महत्वपूर्ण क्षेत्र, जो राष्ट्रीय विकास का एक अभिन्न अंग है, सरकार के एजेंडे से पूरी तरह गायब रहा। इस अनदेखी से सांस्कृतिक समुदाय में निराशा है और यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार संस्कृति को विकास के लिए महत्वपूर्ण मानती है। विशेषज्ञों का कहना है कि संस्कृति की उपेक्षा देश की सामाजिक और आर्थिक प्रगति के लिए हानिकारक हो सकती है। यह संबोधन भविष्य में संस्कृति के प्रति सरकार की नीतियों और दृष्टिकोण को लेकर चिंता पैदा करता है। यह घटना संस्कृति के महत्व को उजागर करती है और सरकार से इस क्षेत्र पर ध्यान देने का आग्रह करती है।

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