फ्रांस और ब्रिटेन के बीच 760,000 यूरो से अधिक के समझौते के तहत, प्रवासियों को रोकने के लिए जल तोपों और अश्रु गैस के इस्तेमाल की योजना बनाई गई है। यह कदम उन प्रवासियों के खिलाफ लिया जाएगा जो दोनों देशों की सीमाओं को पार करने का प्रयास कर रहे हैं। एक मानवाधिकार संगठन ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे "राज्य हिंसा में वृद्धि" बताया है। उनका कहना है कि यह उपाय अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानवाधिकारों का उल्लंघन है। ब्रिटेन ने फ्रांस के इस कदम का समर्थन किया है। इस समझौते का उद्देश्य अवैध प्रवासन को रोकना और सीमा सुरक्षा को मजबूत करना बताया जा रहा है। आलोचकों का मानना है कि यह कदम प्रवासियों के जीवन को खतरे में डाल सकता है।