1970 के दशक के अंत में, एक पूर्व इमाम ने “मैं एक सूलेमान्सी था” नामक एक किताब लिखी। उन्होंने मस्जिदों में इस पुस्तक का वितरण शुरू किया, जिससे इस विचारधारा पर ध्यान आकर्षित हुआ। यह पुस्तक सूलेमान्सी नामक एक विशिष्ट धार्मिक आंदोलन के बारे में जानकारी प्रदान करती है। यह घटना सूलेमान्सी विचारधारा के इतिहास और पुनरुत्थान में संभावित रुचि का संकेत देती है। यह पुस्तक संभवतः इस समूह की मान्यताओं और प्रथाओं पर प्रकाश डालती है। यह धार्मिक प्रवृत्ति तुर्की में सामाजिक और धार्मिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकती है। आगे की जांच इस आंदोलन के वर्तमान प्रभाव को समझने में मदद कर सकती है।