पूर्व पापुआ न्यू गिनी के खिलाड़ी रेमंड मोरतेन ने फीफा में चल रहे विवाद के बीच छोटे देशों की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि फीफा की त्रुटिपूर्ण फंडिंग प्रणाली इन देशों को अपनी राय व्यक्त करने से रोकती है। फीफा द्वारा आवंटित सीमित धनराशि इन देशों को मजबूर करती है कि वे अपनी आलोचना को दबाएं, क्योंकि वे वित्तीय सहायता खोने से डरते हैं। मोरतेन ने इस प्रणाली को अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि यह फीफा के भीतर भ्रष्टाचार और कुशासन को बढ़ावा देता है। इस फंडिंग मॉडल के कारण छोटे देश फीफा के फैसलों पर सवाल उठाने या बदलाव की मांग करने में असमर्थ हैं। यह स्थिति फीफा के भीतर जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी को दर्शाती है, जहाँ शक्तिशाली राष्ट्रों का दबदबा रहता है। मोरतेन ने इस प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है ताकि सभी देशों को समान रूप से अपनी आवाज उठाने का अवसर मिल सके।