एक दंपत्ति को अपनी बेटी पर महिला खतना (FGM) करने के आरोप में दोषी ठहराया गया था, लेकिन 2021 में अपील अदालत ने उनकी दोषसिद्धि को रद्द कर दिया। अदालत ने इस मामले को ‘न्यायिक भूल’ करार दिया है। दंपत्ति पर आरोप था कि उन्होंने अपनी बेटी पर यह क्रूर कार्य किया था, जिसके बाद उन्हें दोषी पाया गया था। हालांकि, उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया। इस फैसले के बाद, पीड़ित बच्ची और उसके परिवार को न्याय मिलने की उम्मीदों को झटका लगा है। यह मामला महिला खतना के खिलाफ कानूनों और उनके कार्यान्वयन पर सवाल खड़े करता है। अदालत का यह फैसला कानूनी प्रणाली में समीक्षा और सुधार की आवश्यकता को भी दर्शाता है।