संवैधानिक न्यायालय (TC) में नए न्यायाधीशों के चुनाव और विशेष रूप से एक चरमपंथी विचारधारा वाले उम्मीदवार की नियुक्ति ने राजनीतिक हलचलों को जन्म दिया है। यह नियुक्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था को खतरे में डाल सकती है या बहुलवाद को सुनिश्चित कर सकती है, इस पर बहस छिड़ गई है। दूसरी ओर, सामाजिक सहायता प्राप्त करने वाले PSU (एक राजनीतिक दल) को अब कार्य करने की आवश्यकता होगी। इस नए नियम से सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों और राजनीतिक दलों के बीच संबंध प्रभावित हो सकते हैं। यह बदलाव PSU के लिए एक नई चुनौती प्रस्तुत करता है, क्योंकि उन्हें अब अपनी गतिविधियों को जारी रखने के लिए सक्रिय रूप से योगदान करना होगा। इन घटनाओं से देश की राजनीतिक और सामाजिक संरचना पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन परिवर्तनों का दीर्घकालिक प्रभाव अभी देखना बाकी है।