1684 में इंग्लैंड में ‘अरस्तू की उत्कृष्ट कृति’ नामक एक पुस्तक प्रकाशित हुई थी। यह पुस्तक वास्तव में एक यौन मार्गदर्शिका थी, जिसमें प्रसूति संबंधी सलाह भी शामिल थी। शुरुआती आधुनिक काल से लेकर 19वीं सदी तक इंग्लैंड में यह व्यापक रूप से लोकप्रिय रही। हालांकि, इस पुस्तक का श्रेय गलत तरीके से प्राचीन यूनानी दार्शनिक अरस्तू को दिया गया था। इस गलत श्रेय के कारण, लेखक की पहचान आज भी रहस्य बनी हुई है। विद्वानों का मानना है कि यह पुस्तक किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा लिखी गई थी, जिसने अरस्तू के नाम का उपयोग लोकप्रियता हासिल करने के लिए किया। यह पुस्तक उस समय के सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण को दर्शाती है।
