हाल के दशकों में एक बड़ा साइक्लिंग प्रयोग किया गया, जिसका परिणाम अनिश्चित था। इस प्रयोग के तहत, रेमको एवेनपोएल ने ‘दौड़ के बिना फॉर्म में आना’ सिद्धांत पर काम किया। उनका मानना था कि प्रशिक्षण से वे टूर के लिए तैयार हो सकते हैं, दौड़ में भाग लेना अनिवार्य नहीं है। यह प्रयोग सफल रहा, और एवेनपोएल ने अपनी क्षमता सिद्ध कर दी है। उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण पर जोर दिया, जो उनके मुताबिक, प्रतिस्पर्धा से ज़्यादा फायदेमंद साबित हुआ। इस प्रयोग ने साइक्लिक प्रशिक्षण के नए तरीकों पर प्रकाश डाला है। यह दिखाता है कि पारंपरिक दौड़ आधारित तैयारी के अलावा भी, बेहतर प्रदर्शन संभव है।