यूरोपीय संघ के नए आप्रवासन समझौते के लागू होने के साथ, बाल्कन क्षेत्र के बुल्गारिया, क्रोएशिया, ग्रीस और रोमानिया जैसे देश नए शरणार्थी नियमों को लागू करने में जुटे हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब दक्षिणपंथी राजनेता आप्रवासन पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस समझौते के कारण मानवीय अधिकारों के उल्लंघन की आशंका व्यक्त की है। नए नियमों का उद्देश्य यूरोपीय संघ की सीमाओं को सुरक्षित करना और अनियमित आप्रवासन को रोकना है। इन देशों को अब यूरोपीय संघ के मानकों के अनुरूप अपनी शरणार्थी नीतियों को बदलना होगा। आलोचकों का कहना है कि ये नियम शरणार्थियों के लिए सुरक्षा की गारंटी को कमजोर कर सकते हैं और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर सकते हैं। इस स्थिति से बाल्कन क्षेत्र में मानवीय संकट गहराने की आशंका है।