यूरोपीय संघ का नया आप्रवासन और शरण समझौता आज से लागू हो गया है। पाँच वर्षों के लंबे विचार-विमर्श के बाद यह समझौता सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने और बाहरी सीमाओं को मजबूत करने पर केंद्रित है। इस समझौते का उद्देश्य शरणार्थियों की आवेदनों से निपटने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि इससे शरण चाहने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उनका कहना है कि यह समझौता यूरोपीय संघ में सुरक्षित आश्रय की तलाश कर रहे लोगों के लिए चुनौतियां खड़ी कर सकता है। यह समझौता सदस्य देशों को शरणार्थियों के बोझ को साझा करने के लिए प्रोत्साहित करता है, लेकिन आलोचकों का मानना है कि यह पर्याप्त नहीं है। इस नए नियम से यूरोपीय संघ में आप्रवासन नीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव आने की उम्मीद है।