तुर्की, राष्ट्रपति एर्दोगान के खिलाफ हुए असफल तख्तापलट के बाद रूस के करीब आ गया था। हालांकि, यह संबंध तुर्की के लिए विशेष रूप से लाभकारी नहीं रहे। ग्रीक प्रकाशन कथिमेरिनी के अनुसार, अंकारा अब अपनी रूसी नीति को समायोजित कर रहा है ताकि अमेरिका के सामने अपने हितों को आगे बढ़ाया जा सके। यह कदम विशुद्ध रूप से सामरिक कारणों से उठाया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप तुर्की नाटो की ओर फिर से उन्मुख हो रहा है। विश्लेषण में कहा गया है कि एर्दोगान प्रशासन अब रूस के साथ संबंधों को संतुलित करने और पश्चिमी सहयोगियों के साथ संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। यह बदलाव भू-राजनीतिक दबावों और तुर्की की अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं का परिणाम है। इस पुनर्संरेखण का उद्देश्य तुर्की की विदेश नीति में अधिक लचीलापन लाना है।
