तुर्की में राष्ट्रपति एर्दोगान के नेतृत्व वाली इस्लामी-रूढ़िवादी सरकार ने दो दशकों से भी कम समय में देश की अर्थव्यवस्था की बागडोर एक सीमित दायरे में आने वाले वफादार व्यापारिक वर्ग और संबंधों के नेटवर्क को सौंप दी है। यह एक ‘संबंध-आधारित’ पूंजीवाद का निर्माण है, जहाँ राजनीतिक निष्ठा और व्यक्तिगत संबंध आर्थिक सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं। सत्ता में आने के बाद, एर्दोगान की पार्टी ने अपने समर्थकों को सरकारी अनुबंधों, लाइसेंसों और अन्य आर्थिक अवसरों तक पहुंच प्रदान की। इसने एक ऐसे कारोबारी वर्ग को बढ़ावा दिया जो राजनीतिक रूप से जुड़ा हुआ है और सरकार के प्रति वफादार है। आलोचकों का कहना है कि इस प्रणाली ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है और प्रतिस्पर्धा को कम किया है, जिससे आर्थिक असमानता बढ़ी है। यह मॉडल तुर्की की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है, क्योंकि यह कुछ चुनिंदा समूहों पर अत्यधिक निर्भर है। इस व्यवस्था ने पारदर्शिता और जवाबदेही को भी कमजोर किया है।