लेखक अपने पिता के रंगमंच पर अभिनय के दिनों को याद करते हैं। उनके अनुसार, नाटक के प्रदर्शन वाले दिन पिता की दिनचर्या सामान्य दिनों से बिल्कुल अलग होती थी। लेखक ने बचपन में ही अपने पिता को देखकर एक अभिनेता की तैयारी की प्रक्रिया को समझा। उन्होंने किसी प्रसिद्ध अभिनेता की जीवनी या डॉक्यूमेंट्री का सहारा नहीं लिया। एक साधारण व्यवसायी होने के बावजूद, उनके पिता का अभिनय के प्रति समर्पण स्पष्ट था। यह अनुभव लेखक के लिए कलात्मक तैयारी को समझने का पहला स्रोत बना। इस प्रकार, पिता का व्यक्तित्व लेखक के लिए प्रेरणा का केंद्र रहा।
